गुरुवार, 18 जून 2009

दायरे में

घूमते तेरी गली के दायरे में

ख़ुद को पाया है खुशी के दायरे में

ढूंढते ही रह गए हम, दिल हमारा

खो गया दीवानगी के दायरे में

आसमानों की बुलंदी छू मगर तू

पैर तेरे हों जमीं के दायरे में

जी रहे थे ये मगर किसको पता था?

ज़िन्दगी है ज़िन्दगी के दायरे में

वो पराये दर्द अपनाता चला है,

हम भटकते हैं खुदी के दायरे में

दिल उलझता जा रहा है आशिकी में

जैसे शहजादा परी के दायरे में

"रूह" बस ये इल्तिजा है आसमाँ से,

मौत आए शाइरी के दायरे में

1 टिप्पणी:

  1. दिल उलझता जा रहा है आशिकी में
    जैसे शहजादा परी के दायरे में

    "रूह" बस ये इल्तिजा है आसमाँ से,
    मौत आए शाइरी के दायरे में

    बहुत खूब
    वीनस केसरी

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